जालौन में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के दर्शन को पहुचे लोग, सीमित रही भीड

गौ संरक्षण और सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए समाज को जागरूक होने का आह्वान”
जालौन। 81 दिवसीय गविष्ठ यात्रा के दौरान जालौन पहुंचे ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के जालौन मे पहुचे जहाँ विवादो से घिरे शंकराचार्य के भक्तो की भी भीड न के बराबर देखी गयी। उन्होंने गौ संरक्षण, सनातन संस्कृति और समसामयिक विषयों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए गाय को हिंदू समाज की पूजनीय माता है,सनातन परंपरा में गाय का विशेष स्थान है और उसे केवल एक पशु के रूप में नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि गाय को माता का दर्जा मिलना चाहिए तथा उसके संरक्षण के लिए समाज को आगे आना होगा।
गौहत्या और बूचड़खानों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि निरपराध गायों की हत्या किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। संत समाज अन्याय और अनीति के विरुद्ध सदैव आवाज उठाता रहा है और आगे भी उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि संतों का दायित्व केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और संस्कृति की रक्षा करना भी उनका कर्तव्य है।
उन्होंने उन बयानों पर भी प्रतिक्रिया व्यक्त की जिनमें एक निश्चित अवधि के बाद गाय को काटने की बात कही जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसी सोच सनातन संस्कृति की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने लोगों से जागरूक रहने और सनातन मूल्यों को समझने की अपील की।
अपने ऊपर लगाए गए आरोपों का उल्लेख करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि न्यायालय ने उन आरोपों को निराधार माना है। उन्होंने कहा कि सत्य कभी भयभीत नहीं होता। साथ ही उन्होंने बताया कि शंकराचार्य पद को लेकर मांगे गए प्रमाणों को उन्होंने निर्धारित समय से पहले ही प्रस्तुत कर दिया था।
कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य का भव्य स्वागत किया तथा उनके विचारों को ध्यानपूर्वक सुना। पूरे आयोजन में धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का वातावरण बना रहा।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x