
फोटो परिचय- सयुंक्त सचिव जिला अधिवक्ता संघ जालौन व जिला विधिक सचिव नेहा निरंजन
उरई जालौन। भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग चन्द्रवंशी द्वारा राष्ट्रीय महिला आयोग, नई दिल्ली की सदस्य श्रीमती डेलिना खोंदुप को पत्र प्रेषित कर कासगंज (उ.प्र.) में पोस्टेड वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं अजाक्स के प्रांताध्यक्ष संतोष वर्मा द्वारा महिलाओं के प्रति कथित रूप से अमर्यादित एवं समाज को विभाजित करने वाले बयान पर अत्यंत गंभीर आपत्ति दर्ज कराई गई है। पत्र में बताया गया है कि संतोष वर्मा ने आरक्षण नीति पर टिप्पणी करते हुए सार्वजनिक मंच से यह विवादित बयान दिया कि “ब्राह्मण अपनी बेटी को दान करे और उनके पुत्र के साथ सम्बन्ध बनायें।” यह बयान न केवल महिला असम्मानजनक है, बल्कि सामाजिक समरसता को भी आघात पहुँचाता है। ऐसी अभद्र एवं आपत्तिजनक टिप्पणी प्रशासनिक सेवा के पद और उसके आचार संहिता के पूर्णतः विरुद्ध है। तो वहीं ज़िला विधिक सचिव नेहा निरंजन ने कहा कि संविधान दिवस के अवसर पर ही एक उच्चाधिकारी द्वारा संविधानिक मूल्यों की धज्जियाँ उड़ाना अत्यंत चिंताजनक है। संविधान द्वारा प्रदत्त समानता, सम्मान और महिलाओं की गरिमा का संरक्षण करने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, यदि वही इस प्रकार की असंवेदनशील भाषा का प्रयोग करें तो यह लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए गंभीर खतरा है। एसोसिएशन ने कड़े शब्दों में इस बयान की निंदा करते हुए कहा है कि यह असभ्य मानसिकता और सामाजिक वैमनस्य को बढ़ावा देने वाला दृष्टिकोण है, जिसकी किसी भी स्तर पर अनुमति नहीं दी जा सकती।
महोदया से अनुरोध किया गया है कि राष्ट्रीय महिला आयोग इस प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराए तथा दोषी अधिकारी के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। साथ ही भविष्य में किसी भी शासकीय अधिकारी द्वारा महिला असम्मानजनक, समाज विरोधी या विभाजनकारी भाषा प्रयोग पर रोक लगाने हेतु कड़े दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ। अभी तक कोई कार्यवाही न होने पर ने भी इस बयान की तीखी निंदा करते हुए तत्काल न्यायोचित कदम उठाने की मांग की है।