
गविष्टि यात्रा से गो संरक्षण का संदेश दिया, बूचड़खानों और गोहत्या को लेकर सत्ता पक्ष पर साधा निशाना
कोंच। गोरखपुर से 81 दिवसीय गविष्टि (गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध) यात्रा के दौरान शनिवार को कोंच पहुंचे ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज का सनातनियों ने जोरदार स्वागत किया और उनकी जय-जयकार की। शंकराचार्य ने गो संरक्षण, सनातन धर्म और समसामयिक मुद्दों पर बड़ी साफगोई से कहा कि गाय हिंदू समाज के लिए पूजनीय और वंदनीय है, उसे केवल एक पशु के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि माता की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में गाय का विशेष महत्व है और उसकी पूजा की जाती है, इसलिए उनकी मांग है कि गाय को राष्ट्र माता घोषित किया जाए।
क्रौंच ऋषि की तप:स्थली कोंच शनिवार को उस समय आध्यात्मिक और धार्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठी, जब ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज अपनी बहुचर्चित ‘गविष्टि यात्रा’ के साथ नगर पहुंचे। झांसी से एट के रास्ते कोंच पहुंचने पर जगद्गुरु शंकराचार्य का मार्कंडेयश्वर तिराहे के समीप सैकड़ों सनातनियों ने फूल-मालाएं पहनाकर स्वागत किया और आरती उतारी। विद्वान ब्राह्मणों ने स्वस्तिवाचन किया। उनके दर्शनों को उमड़ी भीड़ को संबोधित करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि ‘गविष्टि यात्रा’ गोमाता की रक्षा, संवर्धन और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए निकाली जा रही है। इसका उद्देश्य हिंदू समाज को गोसंरक्षण के प्रति जागरूक करना और समाज को एकजुट करना है। बूचड़खानों और गोहत्या के मुद्दे पर बेबाकी से कहा कि निरपराध गायों की हत्या होती रहे और संत समाज मौन बैठा रहे, यह संभव नहीं है। उन्होंने कहा, गाय और सनातन की रक्षा के लिए संत समाज सड़कों पर भी निकलेगा और लोगों को जागृत भी करेगा। उन्होंने कहा कि वह उन संतों में से नहीं हैं जो केवल नेताओं के साथ तस्वीरें खिंचवाने या चंदा लेने तक सीमित रहते हैं। मीडिया से बातचीत में अपने ऊपर लगाए गए तमाम आरोपों पर शंकराचार्य ने बेबाकी से कहा कि न्यायालय ने उनके ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत माना है। उन्होंने कहा कि सत्य कभी डरता नहीं है। साथ ही उन्होंने बताया कि उनसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा गया था, जिसके लिए 24 घंटे का समय दिया गया था, लेकिन उन्होंने 12 घंटे के भीतर ही सभी आवश्यक प्रमाण प्रस्तुत कर दिए थे। शंकराचार्य ने उन बयानों को लेकर भी प्रतिक्रिया दी जिनमें चौदह वर्ष बाद गाय को काटने की बात कही जा रही है। कहा कि ऐसा कहीं भी स्वीकार्य नहीं है और जो लोग इस प्रकार की बातें करते हैं, वे हिंदुत्व और सनातन परंपरा की मूल भावना से अनभिज्ञ हैं। उन्होंने ऐसे लोगों को ‘नकली हिंदू’ बताते हुए हिंदुओं से असली और नकली हिंदुओं की पहचान करने की अपील की। उन्होंने कहा, नकली हिंदू समाज को भीतर से कमजोर कर रहे हैं, इसलिए देश वासियों को ऐसे कालनेमियों से सतर्क रहने की आवश्यकता है, ऐसे लोगों को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाना जरूरी है। उन्होंने गोसंरक्षण के मुद्दे पर सरकार की नीतियों पर भी तीखा प्रहार किया, कहा कि गोमाता की रक्षा केवल भाषणों से नहीं, बल्कि ठोस और प्रभावी कदमों से संभव है। उन्होंने समाज से आगे आकर इस अभियान को जनांदोलन बनाने की अपील की। इस दौरान अनिल वैद, प्रतिपाल सिंह गुर्जर, जमींपाल सिंह गुर्जर, कांग्रेस नगर अध्यक्ष राघवेंद्र तिवारी, प्रधव मिश्रा छोटू , उज्ज्वल तिवारी, ज्योतिषविद संजय रावत, लल्लू राम मिश्रा, प्रमोद शुक्ला, श्याम मोहन रिछारिया, रंजन गोस्वामी, शंभू पटेल, मंत्री धनौरा, अमरेंद्र दुवे, गौरव तिवारी, पवन खिलाड़ी, सुभाष पहारिया, आनंद दुवे, वीरेंद्र श्रृंगीऋषि, अनूप गुर्जर, नवीन मिश्रा, मृदुल दांतरे, भास्कर दुवे, सभासद रघुवीर कुशवाहा, पुनीत वैद, उज्जवल तिवारी, शिवम यादव, अरविंद दीक्षित, शांतनु यादव आदि उपस्थित रहे। कोंच की धरती पर शंकराचार्य के आगमन और ‘गविष्टि यात्रा’ ने गोरक्षा और सनातन संस्कृति के संरक्षण को लेकर एक नई चर्चा और जागरूकता का संदेश दिया है।
इंसेट में-
भीड़ भाड़ में जेबकतरों की रही बल्ले-बल्ले, कईयों की जेबें तराशीं
कोंच। नगर में पधारे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज को देखने सुनने जुटे सैकड़ों लोगों के बीच जेबकतरों ने भी अपने हुनर का कमाल दिखाया और तमाम लोगों की जेबें काटकर नकदी पार कर दी। शंकराचार्य के यहां से प्रस्थान करने के बाद जब लोगों ने अपनी जेबें टटोलीं तो यह देखकर सन्न रह गए कि किसी ने बड़ी सफाई से उनकी जेबें तराश कर उन्हें चूना लगा दिया है। बताया जा रहा है कि शंकराचार्य के आगमन कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में लगे लोगों की भी जेबें तराशी गईं हैं। जेबें कट जाने की शिकायत हालांकि पुलिस से नहीं की गई है। कार्यक्रम स्थल के आसपास सीसीटीवी कैमरे लगे न होने से जेबकतरों की पहचान करनी मुश्किल हो रही है। हैरान करने वाली बात है कि इतनी भीड़ में दिनदहाड़े लोगों की जेबें कट गई और जेबकतरे लोगों की पकड़ में नहीं आ सके।