-12 जून के दैनिक भास्कर में छपी खबर भास्कर इंपैक्ट ——————–खबर छापने के बाद चेती पालिका ने ठीक कराई ध्वस्त इंटरलॉकिंग सड़क टीट-टाप तो हो लेकिन चलेगी कितने दिन 18 लाख की लागत वाली सड़क * साइडों में बिना किसी सपोर्ट के बनी है बक्शेश्वर से काली मंदिर तक की इंटरलॉकिंग सड़क कोंच। नगरपालिका द्वारा लगभग छह महीने पहले बनवाई गई बक्शेश्वर से काली मंदिर तक की इंटरलॉकिंग सड़क ध्वस्त होने की खबर दैनिक भास्कर में प्रकाशित होने के बाद इसका असर यह हुआ कि पालिका ने आनन-फानन सड़क की टीप-टाप करा कर इसके ऐब ढंक जरूर दिए हैं लेकिन बड़ा यक्ष प्रश्न अभी भी खड़ा है कि जिस तरह से मानकविहीन तरीके से इसका निर्माण कराया गया है उसमें यह सड़क टिकेगी कितने दिन। इसके अलावा सड़क की साइडों में किसी तरह का सपोर्ट नहीं होने के कारण भी इस सड़क की उम्र बहुत छोटी होने वाली है, जबकि इसके निर्माण पर 18 लाख की भारी-भरकम धनराशि खर्च की गई है।नगरपालिका द्वारा बनवाई गई उक्त इंटरलॉकिंग सड़क बनने के बाद छह महीने भी ढंग से नहीं चल सकी और इसका उखड़ना शुरू हो गया। दैनिक भास्कर ने 12 जून के अंक में ‘छह महीने भी नहीं चली नगरपालिका द्वारा बनवाई गई इंटरलॉकिंग सड़क’ शीर्षक से इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था जिसका असर यह हुआ है कि नगरपालिका ने इस खबर पर संज्ञान लेकर आनन-फानन सड़क की टीप-टाप करा दी। यहां यह बड़ा सवाल अभी भी मुंह बाए खड़ा है कि जब इस सड़क की साइडों में कोई सपोर्ट ही नहीं है तो यह सड़क कितने दिन टिक पाएगी। इसके निर्माण पर पब्लिक की खून-पसीने की कमाई की 18 लाख की भारी-भरकम राशि खर्च की गई है जो पूरी तरह से पानी में डूबती दिखाई दे रही है। गौरतलब है कि छह महीने पहले नियम कायदों को ताक पर रख कर बक्शेश्वर से काली मंदिर तक 430 मीटर लंबी व 5 मीटर चौड़ी इंटरलॉकिंग सड़क बनाई गई थी जिसके निर्माण पर 18 लाख की लागत आई थी। उस सड़क के निर्माण की गुणवत्ता की पोल बहुत जल्द ही खुलकर सामने आ गई जब सड़क ध्वस्त होनी शुरू हो गई और इंटरलॉकिंग उखड़ने लगी। इस सड़क के निर्माण को लेकर पालिका के एक पूर्व सभासद अनिल पटेरिया ने 27 फरवरी को शासन में भी ऑनलाइन शिकायत की थी कि मौजा कोंच बदनपुरा के गाटा संख्या 2016 व 2093 सरकारी गूल के एक बड़े हिस्से को मिसमार करके उस पर अवैधानिक रूप से इंटरलॉकिंग कार्य कराया गया है।
नगरपालिका द्वारा हाल ही में टीप-टाप कराई गई इंटरलॉकिंग सड़क
