इमाम हुसैन ने नाना का दीन बचाने के लिए दी कुर्बानी

-नवासा-ए-रसूल की कुर्बानी सुन लोग हुये भावुक

उरई। मुस्लिम वैलफेयर एसोसिएशन की ओर से मोहल्ला तिलक नगर के बरकाती ग्राउंड में दस दिवसीय प्रोग्राम की दूसरी महफ़िल में शनिवार की रात पैगाम-ए-शहीदे आजम कॉन्फ्रेंस का आगाज हाफिज फजले अजीम ने तिलावते कलाम पाक से किया।
कॉन्फ्रेंस में सैय्यद आमिर मियां ने कहा, इमाम हुसैन अपने नाना पैगम्बरे-इस्लाम का दीन बचाने के लिए कर्बला के मैदान में अपनी कुर्बानी पेश करने के लिए आए थे। उन्होंने बचपन में अपने नाना से इस अजीम कुर्बानी का वादा किया था और कर्बला में वही वादा वफा किया। शराब के नशे में चूर रहने वाला व जुए के शौकीन यजीद के जुल्म के खौफ से उस समय के अनेक धर्मगुरु या तो अंडरग्राउंड हो गए थे या उन्होंने यजीद के सामने समर्पण कर दिया था। यजीद ने यह हुक्म दिया था कि हुसैन या तो उसकी खिलाफत को कबूल करें या उन्हें मार दिया जाए। इमाम ने यजीद के सामने समर्पण करने से बेहतर शहीद होना समझा। हुसैन अगर यजीद को खलीफा मान लेते तो आज दुनिया में हकीकी इस्लाम का नाम लेने वाला कोई नहीं होता। इसके पहले शायर अशरफ वेग बरकाती ने मनकबत पढ़ी, दोस्ती निभाते है, ये खता नहीं करते, हम हुसैन वाले है, हम दग़ा नहीं करते। इसके बाद सैय्यद नूर आलम मिस्बाही ने अबू बकर सिद्दीक की सखावत (उदारता) बयान करते हुये कहा कि हुज़ूर (स.अ.व.) ने अपनी जिंदगी में ही हज़रत अबू बक्र सिद्दीक को अपनी जगह इमामत में खड़ा करके सहाबा को यह इशारा कर दिया था की मेरे बाद सिद्दीक ए अकबर खलीफा होंगे, और इस रिवायत का हदीस की किताबों में कई जगह ज़िक्र है। अंम्बिया के बाद सबसे आला मकाम हज़रत अबू बक्र सिद्दीक का है। कहा कि उन्होंने इस्लाम और मुसलमानों की भलाई के लिए अपना धन खुलकर दान किया। इस दौरान शारिक बेग बरकाती, एडवोकेट नासिरउद्दीन, वासिक बेग, अब्दुल वहाब, अब्दुल रज़्ज़ाक़, कामिल बेग, मकसूद, आकिल बेग, मसरूर, तौसीफ, हम्माद, इरशाद निज़ामी, आसिफ बेग, तौसीफ, वामिक बेग, रफ़ीउद्दीन पंन्नू, रिज़वान सिद्दीकी, रईस, अनवारुल, शबीउद्दीन, दानिश, तारिक, ज़िया, रूमान आदि लोग रहे।

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मोहर्रम की तैयारिया तेज,बनने लगे ताजिया व सजने लगी ढाले

उरई : शहर में मोहर्रम के लिए ताजिये सजाए जाने लगे है। मुस्लिम इलाकों में ताजिया बनाने की तैयारियां जोरों पर चल रही है। वहीं मोहर्रम के लिए ढालें भी सजने लगी हैं। जो मोहर्रम के जुलूस में शामिल होंगी।
बता दे कि मुख्यालय के अलग-अलग स्थानों पर ताजिया बनाने का काम तेजी के साथ किया जा रहा है। मुख्यालय के तिलक नगर चौराहे के समीप शरीफ पठान आवास पर शाहिद खान द्वारा ढाल सवारी बनकर तैयार हो चुकी है, जिसे कारीगरो द्वारा सजाने सवारने का कार्य किया जा रहा है। वहीं सदन पुरी स्थित राजा अली के आवास पर ताजिया बनाने का कार्य जारी है। सभी ताजिये मोहर्रम में शामिल करने वाले हैं। इन ताजियों को रंग बिरंगी पतंगियों के अलावा थर्माकोल, रुई व अन्य चीजों के सजाकर तैयार किया जा रहा है। इस कार्य के लिए आदिल बरकाती, राज पठान, रज्जब अली, फिरोज, शोएब, आदिल हम्माल ने सयुंक्त रूप से बताया कि करीब एक माह से वह व उनके साथी ताजिये को तैयार कर रहे हैं। जो कि लगभग पूरा चुका है। जो हिस्सा बांकी है वह भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

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