93 एफटीओ डिलीट होने से डीएम के समक्ष रामपुरा प्रधान संघ लामबंद

  • भुगतान की गड़बड़ी के पीछे ब्लाक प्रमुख का हाथ
  • अमृत सरोवर जैसे महत्वपूर्ण योजना के भुगतान लंबित पड़े
  • फीडिंग के दौरान हुआ प्रधानों के साथ भेदभाव

माधौगढ़(जालौन)- विकास खंड रामपुरा में प्रधान संघ का मामला पेचीदा होता जा रहा है यह मामला जिलाधिकारी जालौन के समक्ष पहुंचने से कई बिंदुओं से घिर गया है प्रधानों के लगे आरोप स्पष्ट कर रहे है कि उनके साथ भेदभाव हुआ है क्योंकि क्षेत्र पंचायत द्वारा कराये गये कार्यों का भुगतान समय पर कर दिया गया जबकि ग्राम पंचायतों के पक्के कार्यों का भुगतान अब तक नही हो सका जबकि 2023 – 24 एवं 2024 -25 में कार्यों की भुगतान के लिए फीडिंग कराई गयी लेकिन सम्भवता भुगतान पर मोहर नही लगी जबकि शासन की महत्वपूर्ण योजना अमृत सरोबर को बने हुए लम्बा समय हो गया लेकिन भुगतान नही हो सका तो वहीं ग्राम प्रधान ने इस बड़ी गड़बड़ी के पीछे ब्लाक प्रमुख अजीत सेंगर का हाथ होने का आरोप लगाया है प्रधानों का आरोप है कि विकास खंड की 44 ग्राम पंचायतों ने 93 एफटीओ की फीडिंग करायी थी उसी क्रम में भुगतान लगा दिये जाते लेकिन ब्लाक प्रमुख के कहने पर क्षेत्र पंचायत में 10 एफटीओ फीड करवा दिये जबकि ग्राम पंचायत एफटीओ डिलीट करवा दिये जबकि वहीं ग्राम प्रधानों का कहना है कि सूची में भुगतान प्रक्रिया के अनुसार एफटीओ की फीडिंग क्रम के अनुसार होनी चाहिए जिससे भुगतान में किसी प्रकार की परेशानी न हो। जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देते हुए प्रधान रामशंकर पाल , अरविन्द परिहार , मंजीत सिंह , सौरभ कुमार , प्रमोद कुमार , इंद्रजीत सिंह , ओमप्रकाश, भानू प्रताप सिंह , प्रदीप कुमार , सुनील कुमार , योगेश कुमार , भानु प्रताप , प्रहलाद सिंह , गुड्डी देवी , आदि ने ग्राम पंचायत में भुगतान को लेकर गड़बड़ी की बात कही।

इनसेट
भुगतान ना होने से प्रधानों का दर्द
प्रधानों का कहना है कि 2023-24-25 से भुगतान प्रक्रिया में गड़बड़ी की गयी है पक्के कार्यों के अब तक भुगतान नही हो सके जबकि इस बार 93 एफटीओ फीड करवाए थे ताकि भुगतान हो सके लेकिन एफटीओ डिलीट करवा दिये गये ग्राम पंचायतों के भुगतान समय पर नही होते जबकि क्षेत्र पंचायतों के कार्यों के भुगतान समय पर कर दिये जाते है।

पंचायती राज व्यवस्था की प्रधान निचली कड़ी
प्रधानों ने अपने दर्द को उजागर करते हुए कहा कि सूची का क्रम बदलकर उनके साथ गड़बड़ी कर दी जाती है जबकि पंचायती राज व्यवस्था के तौर पर प्रधान सबसे निचली कड़ी में शामिल में है प्रधानों के साथ अनहित होने से उनमें खिन्नता है तो वहीं शासन की अमृत सरोबर योजना के भुगतानों में अब तक मोहर नही लग सकी।

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