निजी करण के विरोध में विद्युत विभाग के अधिकारियों ने धरना दिया

सरकार निजी करण से कदम पीछे खींचेनिजी करण के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त परिषद के तत्वाधान में बुधवार को बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने धरना देकर नाराजगी जाहिर की। इस समय विद्युत विभाग के कर्मचारी निजीकरण के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं। कई दिनों से कर्मचारी विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले धरना देकर सरकार से मांग कर रहे हैं कि निजीकरण जैसा घातक कम ना उठाये अन्यथा हम लोग आंदोलन को और तेज करने के लिए विवश हो जाएंगे। विद्युत कर्मचारी संयुक्त समिति के संयोजक, एसडीओ ग्रामीण सूरज सोनी, के नेतृत्व में एसी ऑफिस में धरना दिया गया। धरने में बड़ी संख्या में बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। धरना स्थल पर अधिशासी अभियंता प्रथम जितेंद्र नाथ महेंद्र कुमार भारती उपखंड अधिकारी ऋषभ राजपूत, गौरव गुप्ता, सूरज सोनी, कुमार शंकर सिंह, राम सुधार, धर्मेंद्र सिंह के अलावा अवर अभियंता अमर पांडे अंकित सिंह, मुकुल वर्मा, देवेंद्र कुमार, जितेंद्र कुमार, लेखाकार श्रवण कुमार शर्मा, अवर अभियंता जगदीश वर्मा, संतोष कुमार और गौरव ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर निजीकरण का विरोध जताया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक एसडीओ सुरज सोनी ने कहा कि निजीकरण से कर्मचारियों और अधिकारियों के अधिकारों का हनन होगा। सरकार ऐसा कोई कदम न उठाए जिससे कि विभाग में सेवारत अधिकारी और कर्मचारी के अधिकार छिन जाए। उन्होंने कहा कि हम लोग लंबे समय से निजीकरण का विरोध करते आ रहे हैं लेकिन सरकार इस दिशा में गंभीर नहीं दिख रही। अगर यही आलम रहा तो हम लोग अपने आंदोलन को और अधिक तेज करने के लिए मजबूर हो जाएंगे ।उसकी सारी जिम्मेदारी सरकार की रहेगी ।विद्युत विभाग का कर्मचारी मौजूदा समय में क्षमता से अधिक मेहनत करके विभाग की तरक्की कर रहा है। विद्युत आपूर्ति सुचारू रूप से जारी रखने के साथ ही वसूली में भी जी जान से अधिकारी और कर्मचारी जुड़ा हुआ है। ऐसी दशा में अगर निजीकरण करके हम लोगों का अहित किया जाता है तो यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर निजीकरण किया जाता है तो हमारा आंदोलन तेज होगा और इसकी जिम्मेदारी सरकार की रहेगी।

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