उरई, जालौन। विकास भवन स्थित रानी लक्ष्मीबाई सभागार में जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में तीन प्रमुख विषयों—मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, राजस्व वसूली और सड़क सुरक्षा—पर अलग-अलग बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए जनहित से जुड़े मामलों में ठोस क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत अब प्रत्येक जोड़े को दी जाने वाली आर्थिक सहायता राशि ₹51,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख कर दी गई है। इस योजना का लाभ अब अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और सामान्य वर्ग के उन परिवारों को मिलेगा जिनकी वार्षिक आय 3 लाख रुपये तक है। इसमें से ₹60,000 सीधे कन्या के खाते में DBT के माध्यम से, ₹25,000 विवाह सामग्री (वस्त्र, फर्नीचर, बर्तन आदि) पर और ₹15,000 विवाह आयोजन (टेंट, भोजन आदि) पर खर्च किए जाएंगे। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि पात्र परिवारों को चिन्हित कर योजना का लाभ समयबद्ध रूप से सुनिश्चित किया जाए। राजस्व वसूली समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि वसूली कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वाणिज्य कर, स्टांप और परिवहन विभाग की वसूली में कमी पर नाराजगी जताते हुए कार्यशैली में सुधार के निर्देश दिए गए। सभी अधिकारियों को लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत वसूली, अतिक्रमण हटाने, लंबित वादों के शीघ्र निस्तारण और कर अपवंचन पर नियंत्रण हेतु ठोस कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए गए। सड़क सुरक्षा समिति बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विभागों के बीच आपसी समन्वय जरूरी है। उन्होंने तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग, बिना फिटनेस या प्रदूषण प्रमाण पत्र वाले वाहनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। स्कूलों में जागरूकता अभियान, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में चेतावनी संकेत लगाने और रोडवेज बसों को निर्धारित स्थानों पर ही खड़ा करने के निर्देश भी दिए गए। इन बैठकों में मुख्य विकास अधिकारी के.के. सिंह, सीएमओ डॉ. नरेंद्र देव शर्मा, नगर मजिस्ट्रेट राजेश वर्मा, उप जिलाधिकारी नेहा ब्याडवाल, एआरटीओ सुरेश कुमार, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी समेत सभी संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
तीन बड़ी पहल: विवाह योजना में बढ़ी सहायता राशि, राजस्व वसूली में सख्ती और सड़क सुरक्षा पर सख्त रुख
