- जब स्थानीय अधिकारियों ने नहीं सुनी तो डीएम के दरवाजे पहुंचे न्याय मांगने
- मामला कथित तौर पर डॉक्टर की लापरवाही से हुई 11 वर्षीय किशोर की मौत का
कोंच। करीब सप्ताह भर पहले यहां एक निजी अस्पताल में इलाज कराने गए 11 साल के किशोर की मौत पर उसके परिजन न्याय पाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। जब तमाम मिन्नतों के बाद भी स्थानीय अधिकारियों से उन्हें न्याय नहीं मिला तो उन्होंने डीएम का दरवाजा खटखटाया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि डॉक्टर द्वारा इलाज में कथित तौर पर लापरवाही की गई जिसके कारण उनके बेटे की मौत हो गई। कस्बे के नया पटेल नगर में स्थित बच्चों के निजी अस्पताल वात्सल्य क्लिनिक पर हुए इलाज के बाद 11 वर्षीय किशोर विवेक की सनसनीखेज मौत का मामला दिनों दिन तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से मृतक किशोर विवेक प्रजापति के परिजनों द्वारा की गई शिकायतें बेकार साबित हुई हैं। परिजनों का कहना है कि उन्होंने एसडीएम के साथ साथ पुलिस को भी लिखित शिकायत दी है लेकिन अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। परिजनों का कहना है कि आखिर गरीब को न्याय कैसे मिलेगा क्योंकि डॉक्टर की लापरवाही ने उनके बेटे की जान ले ली है। परिजनों के मुताबिक जब कोंच के अधिकारियों से उन्हें न्याय नहीं मिला तो इसके बाद अब उन्होंने जिलाधिकारी के यहां इस उम्मीद से शिकायत की है कि शायद वहां से उन्हें न्याय मिल सके। मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई है जिसमें मृत्यु का कारण श्वास नली में तरल पदार्थ का फंसना बताया गया है। गौरतलब है कि गुजरी 14 जुलाई को कस्बे के मोहल्ला गांधीनगर निवासी रामू प्रजापति के 11 वर्षीय बेटे विवेक को मुंह में छालों और पेट में दर्द की शिकायत हुई तो परिजन उसे नया पटेल नगर उरई रोड स्थित वात्सल्य क्लिनिक पर ले गए। परिजनों के मुताबिक वहां डॉ. उपेंद्र ने विवेक को बोतल चढ़ाई और इंजेक्शन देकर घर भेज दिया। इसके कुछ ही घंटे बाद विवेक की तबीयत रात में अचानक ही काफी बिगड़ गई और उसके मुंह से झाग निकलने लगा। विवेक की ऐसी स्थिति देख परिजनों के होश उड़ गए और घबरा कर उसी वात्सल्य क्लिनिक पर ले गए। परिजनों का आरोप है कि वह काफी देर तक दरवाजा खटखटाते रहे लेकिन किसी ने उनकी गुहार नहीं सुनी। इसके बाद सूचना पर पहुंची यूपी 112 पीआरबी की मदद से विवेक को सीएचसी ले जाया गया जहां डॉक्टर ने परीक्षण करने के बाद विवेक को मृत घोषित कर दिया। अगर डॉ. उपेंद्र दरवाजा खोल देते और सही वक्त पर विवेक को उपचार मिल जाता तो शायद उसकी जान बच जाती। ज्ञातव्य है कि इस अस्पताल के क्रियाकलापों की जांच के लिए सीएमओ ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है जो एक दो दिन में यहां आकर छानबीन करेगी और अपनी रिपोर्ट सबमिट करेगी। जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।
