किशोर की मौत मामले में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, सील किया गया वात्सल्य क्लिनिक

  • नायब तहसीलदार और सीएचसी अधीक्षक के साथ पहुंचे एसीएमओ
  • सीएचसी पहुंची जांच टीम ने बंद कमरे में लिए मृतक किशोर के परिजनों के बयान
    कोंच। पिछले दिनों एक निजी अस्पताल में कथित तौर पर डॉक्टर द्वारा किए गए गलत इलाज के कारण 11 वर्षीय एक किशोर की हुई मौत के मामले में सोमवार को स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वात्सल्य क्लिनिक नामक अस्पताल को सील कर दिया है। कार्रवाई के दौरान प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार शादुल्लाह खान भी मौजूद रहे। इससे पहले जांच टीम ने बंद कमरे में मृतक किशोर के परिजनों के बयान कलमबद्ध किए।
    14 जुलाई को वात्सल्य क्लिनिक में हुए इलाज के बाद 11 वर्षीय किशोर विवेक कुमार प्रजापति की मौत के मामले की डीएम के यहां हुई शिकायत के बाद सोमवार को दो सदस्यीय जांच टीम जिसमें एसीएमओ डॉ. अरविंद भूषण तथा सीएचसी अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार शाक्य ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच टीम ने सबसे पहले मृतक के पिता रामू और उसकी पत्नी के बयान कलमबद्ध किए। इसके बाद पूरे लाव-लश्कर के साथ नया पटेल नगर स्थित वात्सल्य क्लिनिक पहुंचे लेकिन वहां डॉ. उपेंद्र नदारद मिले। नायब तहसीलदार शादुल्लाह खान भी प्रशासन के प्रतिनिधि के तौर पर पहुंच गए थे। अस्पताल में तमाम जांच पड़ताल के बाद टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील कर दिया। डॉक्टर के ऑफिस में कुछ आयुर्वेदिक दवाएं मिलीं हैं। एसीएमओ ने बताया कि पीड़ित के बयान लेने के बाद निजी अस्पताल का निरीक्षण किया गया था। डॉक्टर के पास बीएएमएस की डिग्री है और वह एलोपैथी की कुछ ही दवाओं का प्रयोग कर सकते हैं। बोतल और इंजेक्शन भी मरीजों को नहीं लगा सकते हैं, न ही बच्चों को भर्ती ही कर सकते हैं।
    गौरतलब है कि पिछले एक सप्ताह से गांधीनगर मोहल्ले के रहने वाले 11 वर्षीय किशोर विवेक कुमार प्रजापति की कथित तौर पर गलत इलाज के कारण हुई मौत का मामला काफी चर्चाओं में है। मृतक के पिता रामू के मुताबिक वह विवेक को मुंह में छाले और पेट दर्द की शिकायत पर कस्बे के नया पटेल नगर में स्थित निजी अस्पताल वात्सल्य क्लिनिक ले गया था जहां क्लिनिक के संचालक डॉ. उपेंद्र द्वारा विवेक को ड्रिप चढ़ाई गई और इंजेक्शन दिया गया। इसके बाद कुछ दवाएं देकर छुट्टी कर दी गई लेकिन रात में अचानक विवेक की तबीयत बिगड़ी और मुंह से झाग निकलने लगा तो वह दोबारा से वात्सल्य क्लिनिक पहुंचा लेकिन डॉक्टर ने न तो दरवाजा खोला और न ही उसके बच्चे को देखा। इसके बाद वह सीएचसी पहुंचा जहां डॉक्टर ने उसके बच्चे को मृत घोषित कर दिया। रामू का आरोप है कि डॉक्टर के गलत इलाज के कारण उसके बच्चे की जान गई है।
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