राधाकृष्ण मंदिर में दर्शन करने पहुंचे हजारों भक्त
चप्पे चप्पे पर रहे सुरक्षा के कड़े इंतजाम
भाद्रपद माह की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी हर्षौल्लास के साथ मनाई गई। इस मौके पर मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की गई। रात्रि 12 बजे मंदिर और देवालय घंटा घड़ियालों और नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैयालाल की जय कारों से गूंजने लगे। गल्ला मंडी स्थित राधा कृष्ण मंदिर में भगवान कृष्ण के दर्शन करने के लिए देर रात तक भक्तों का ताता लगा रहा। यहां जिले भर से लोग दर्शन करने पहुंचे। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।
मंदिरों को सजाया गया सुंदर रूप में
नगर के प्रमुख मंदिरों जैसे श्री राधा-कृष्ण मंदिर, इस्कॉन मंदिर, गोविंद देव मंदिर, श्री बिहारी जी मंदिर, एवं राधा रमण मंदिर आदि को फूलों, रंग-बिरंगी झालरों, विद्युत झालरों व रंगोली से भव्य रूप से सजाया गया। भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर समितियों द्वारा पंडाल, प्रसाद वितरण, पानी की व्यवस्था और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। श्री बिहारी जी मंदिर में ठाकुर जी का भव्य श्रृंगार किया गया। रात्रि 12 बजे जैसे ही कृष्ण जन्म की वेला आई, भक्तों ने “हरे रामा हरे कृष्णा” के भजन गाते हुए आरती की। चारों ओर शंख, घंटा और मृदंग की मधुर ध्वनि गूंज उठी। इसके पश्चात प्रसाद वितरण किया गया।
झाकियां रही आकर्षण का केंद्र
नगर में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित झांकियों का आयोजन भी किया गया, जिसमें श्रीकृष्ण के बाल्यकाल, माखन चोरी, रासलीला, कालिया नाग मर्दन, गोवर्धन उठाना, गीता उपदेश आदि प्रसंगों को भव्य रूप में प्रदर्शित किया गया। झांकियों को देखने के लिए भारी संख्या में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग उमड़े। जगह-जगह भजन संध्या और रासलीलाएं भी आयोजित की गईं।
बाल स्वरूप में सजे छोटे-छोटे ‘कन्हैया’ और ‘राधा’ बने बच्चों ने लोगों का दिल जीत लिया। स्कूलों और सामाजिक संगठनों द्वारा रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, जिसमें कृष्ण-राधा की झांकी, नृत्य नाटिका और गायन शामिल रहा। माता-पिता ने अपने बच्चों को श्रीकृष्ण और राधा की वेशभूषा में सजा कर मंदिरों में दर्शन करवाए।
भगवान का जन्म होते ही मंदिर जय कारों से गूंजे
शाम से ही मंदिरों में कीर्तन-भजन का कार्यक्रम शुरू हो गया था। जैसे-जैसे समय रात 12 बजे के करीब पहुंचा, श्रद्धालुओं की उत्सुकता बढ़ती गई। ठीक 12 बजे मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य की घोषणा हुई। जय कन्हैया लाल की, नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की जैसे जयघोषों से माहौल गूंज उठा। मंदिरों की घंटियों और शंखनाद से वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया। पुजारियों द्वारा भगवान का विशेष अभिषेक, आरती व श्रृंगार किया गया।
प्रशासन की मुस्तैदी रही सराहनीय
जन्माष्टमी पर्व को देखते हुए प्रशासन ने भी कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे। नगर के प्रमुख मंदिरों और झांकी स्थलों पर पुलिस बल तैनात किया गया। CCTV कैमरों से निगरानी रखी गई। नगर पालिका द्वारा साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया। सुरक्षा इतनी कड़ी थी कि परिंदा भी पर न मार सके
आस्था और उल्लास में डूबे लोग
जन्माष्टमी के दिन हजारों श्रद्धालुओं ने निर्जला व्रत रखा। पूरे दिन फलाहार कर भगवान की आराधना की और आधी रात तक भजन-कीर्तन में लीन रहे। भक्तों ने घरों में झूले सजाए और लड्डू गोपाल को झूला झुलाया। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर मंदिरों में दर्शन हेतु पहुंचीं। घर-घर में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की कहानियाँ सुनाई गईं।
पुलिस लाइन में भव्य रूप में मनाई गई जन्माष्टमी
पुलिस लाइन में भी जन्माष्टमी धूम धाम से मनाई गई। यहां विधिवत रूप से भगवान का जन्म कराया गए। भजन कीर्तन भी किए गए। पुलिस अधीक्षक दुर्गेश कुमार ने पुलिस लाइन पहुंच कर मंदिर में विधि विधान से पूजा अर्चना की। बाद में पुलिस लाइन में प्रसाद का वितरण हुआ। सभी थाने में भी जन्माष्टमी का पर्व हर्षौल्लास के साथ मनाया गया।
शहर में निकली शोभायात्रा
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में नगर में भव्य शोभायात्रा भी निकाली गई, जिसमें रथों पर सजे राधा-कृष्ण, ग्वाल-बाल, गायें, बांसुरी बजाते श्रीकृष्ण की झांकियां लोगों को मोह रही थीं। शोभायात्रा में भक्तगण ढोल-नगाड़ों की धुन पर झूमते हुए चल रहे थे। जगह-जगह पुष्प वर्षा, जल सेवा और भजन मंडलियों की प्रस्तुति से वातावरण और भी आनंदमय हो गया।
सामाजिक संगठनों ने किए आयोजन
कई समाजसेवी संगठनों और व्यापारिक संस्थानों ने भी जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में भंडारे, जल वितरण, झांकी प्रतियोगिता और कृष्ण लीला के कार्यक्रम आयोजित किए। स्कूलों में बच्चों द्वारा राधा-कृष्ण वेशभूषा प्रतियोगिता आयोजित की गई। इन आयोजनों ने बच्चों में सांस्कृतिक चेतना और भक्ति भावना को बढ़ाया।
श्रद्धालुओं की भावनाएं
नगर के श्रद्धालुओं ने बताया कि जन्माष्टमी उनका प्रिय पर्व है, क्योंकि इसमें भक्ति के साथ-साथ सांस्कृतिक समरसता और सामाजिक मेल-मिलाप का भाव भी देखने को मिलता है। एक श्रद्धालु रेखा देवी ने कहा, “श्रीकृष्ण भगवान की लीलाएं हमें जीवन में धर्म, नीति और प्रेम की प्रेरणा देती हैं।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व शहरी क्षेत्र सहित ग्रामीण क्षेत्रों में भी आस्था, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। मंदिरों में घंटा-घड़ियाल और भक्तों के जयकारों से पूरा वातावरण श्रीकृष्णमय हो गया। इस पावन अवसर ने समाज को आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक समरसता और नैतिक मूल्यों की ओर प्रेरित किया। श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण से अपने जीवन को धर्म, सेवा और प्रेम के मार्ग पर चलाने की प्रार्थना करते नजर आये गल्ला मंडी स्थित राधा कृष्ण मंदिर सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र रहा। यहां शाम से ही श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो गए थे ।देर रात तक हजारों की संख्या में भक्तों ने राधा कृष्ण मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना की गल्ला मंडी में लगी दुकानों पर लोगों ने खूब खरीददारी की। सुरक्षा की दृष्टि से राधा कृष्ण मंदिर के आसपास पीएसी और पुलिस तैनात की गई थी।महिला सिपाहियों को भी सुरक्षा में लगाया गया था।
