शहर में रहे सुरक्षा के कड़े इंतजाम, 2007 में बसपा से विधायक बने थे छोटे सिंह
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में भेजे गए जेल
उरई दैनिक भास्कर। जनपद में करीब तीन दशक पुराने एक बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पूर्व विधायक छोटे सिंह को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले को न्याय प्रणाली की बड़ी जीत और पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की प्रतीक्षा के अंत के रूप में देखा जा रहा है। न्यायालय के संभावित निर्णय को देखते हुए शहर में सुबह से ही सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए गए थे। जिले के कई सीओ और आधा दर्जन से अधिक थानों का फोर्स जिला मुख्यालय पर तैनात किया गया था।
तीन दिन पहले न्यायालय ने पूर्व विधायक को दोषी करार दिया था। गुरुवार, 11 सितंबर 2025 को जिला एवं सत्र न्यायालय (ईसी एक्ट कोर्ट) ने उम्रकैद की सजा सुनाई। 1994 के चर्चित दोहरे हत्याकांड में न्यायमूर्ति भारतेंदु सिंह की बेंच ने उन्हें दोषी मानते हुए धारा 302, 307 और 148 भादंवि में अलग-अलग सजा सुनाई है।
1994 में हुआ था दोहरा हत्याकांड
यह मामला वर्ष 1994 का है। बिनौरा बेद गांव में दो लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी ।इस घटना में एक व्यक्ति घायल भी हुआ था । घटना के वक्त क्षेत्र में काफी तनाव फैल गया था। मामले में कई लोगो के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
चप्पे चप्पे पर तैनात रही पुलिस
फैसले के दिन सुबह 8 बजे से ही कोर्ट परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो गई थी। एएसपी प्रदीप कुमार वर्मा, सीओ माधवगढ़ अंबुज यादव, कालपी सीओ अवधेश कुमार सिंह, कोंच सीओ परमेश्वर प्रसाद और सिटी मजिस्ट्रेट राजेश वर्मा के साथ 14 थानों की पुलिस तैनात थी। करीब सवा दस बजे छोटे सिंह सफेद शर्ट और काली पैंट पहनकर अधिवक्ताओं के घेरे में पुलिस को चकमा देकर कोर्ट में दाखिल हो गए।
कोर्ट की कार्यवाही और फैसला
लग भग 11 बजे सुनवाई शुरू हुई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजेश चतुर्वेदी ने करीब 10 मिनट तक पक्ष रखा और न्यायालय से कम से कम सजा देने की अपील की। दोपहर 12:30 बजे अदालत ने फैसला सुनाते हुए पूर्व विधायक छोटे सिंह चौहान को उम्रकैद की सजा सुनाई। धारा 302 (हत्या) में उम्रकैद धारा 307 (हत्या का प्रयास में 4 वर्ष तथा धारा 148 हथियारों से लैस होकर हमला 2 वर्ष की सजा दी गई।
हाथ हिलाते हुए निकले बाहर
सजा सुनाए जाने पर चौहान के चेहरे पर मायूसी साफ झलक रही थी। हालांकि कोर्ट से बाहर निकलते समय वे पुलिस कस्टडी में समर्थकों की ओर हाथ हिलाते हुए निकले। उन्होंने कहा— “मुझे न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। इस फैसले के बाद मैं हाईकोर्ट जाऊंगा।” कोर्ट परिसर के बाहर समर्थकों की भीड़ मौजूद थी, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल सतर्क रहा।
गोलियों की आवाज से तड़ तड़ा उठा था गांव
दोहरे हत्याकांड का मामला 30 मई 1994 को चुर्खी थाना क्षेत्र के बिनौरा बैध गांव का है। प्रधानी चुनाव की रंजिश में अंधाधुंध फायरिंग शुरू हुई थी। इस हमले में राजा भैया और जगदीश शरण की मौके पर ही मौत हो गई थी। जबकि वीरेन्द्र सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
सुप्रीम कोर्ट की शरण लीथी वादी पक्ष ने
18 फरवरी 1995 को इस मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायालय में शुरू हुई। इस बीच छोटे सिंह 2007 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े और कालपी विधानसभा सीट से विधायक बने। बीच में पूर्व विधायक छोटे सिंह का केस वापस लेने की भी प्रक्रिया शुरू हुई थी।
वादी पक्ष ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। लंबी सुनवाई के बाद 24 अप्रैल 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल और सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया और शीघ्र सुनवाई के आदेश दिए। इसके बाद जालौन की अदालत में 27 अगस्त 2025 से दोबारा सुनवाई शुरू हुई। 8 सितंबर 2025 को पूर्व विधायक को दोषी ठहराया गया और 11 सितंबर को सजा सुना दी गई। इससे पूर्व 8 सितंबर को सुनवाई के दौरान चौहान ने व्यक्तिगत कारण बताते हुए हाजिरी माफी का प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया था।
पिछला विधानसभा का चुनाव बहुत कम वोटो से हार गए थे छोटे सिंह
छोटे सिंह चौहान का राजनीतिक कैरियर उतार चढ़ाव भरा रहा है।
2007 में वे बसपा से विधायक बने।
2021 में भाजपा में शामिल हुए।
2022 का चुनाव उन्होंने निषाद पार्टी से लड़ा, लेकिन मात्र 2816 वोटों से हार गए। अब यह सजा उनके राजनीतिक भविष्य पर बड़ा असर डाल सकती है।
फोटो 11, 12 व 13
फोटो परिचय- सजा सुनाए जाने के बाद जेल जाते समय समर्थकों का अभिवादन करते छोटे सिंह,शहर में तैनात रहा पुलिस फोर्स