जालौन से ब्रजेश उदैनियाँ की रिपोर्ट
0-बौद्धिक काउंसलिंग ग्रुप द्वारा
जालौन।जालौन की अंतिम शासिका महान क्रांतिकारी वीरांगना, प्रथम महिला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महारानी ताइबाई को उचित सम्मान दिलाए जाने के लिए बौद्धिक काउंसलिंग ग्रुप जालौन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सहकारी संघ के अध्यक्ष चंद्रपाल यादव को एक ज्ञापन सोपा गया। बौद्धिक काउंसलिंग ग्रुप के सदस्य के सचिव केसी पाटकार अध्यक्ष वाचस्पति मिश्रा आदि एक दर्जन से अधिक लोगों ने अंतर्राष्ट्रीय सहकारी संघ के अध्यक्ष चंद्रपाल यादव को एक ज्ञापन सौंपते हुए बताया की जालौन नगर की ताई बाई महान क्रांतिकारी अंतिम शासिका को उचित सम्मान दिलाया जाए, जिन्होने अंग्रेजो से लोहा लेकर नगर की रक्षा की थी अंत मे अंग्रेजो ने उन्हे पकडकर आजीवन काराबास दिया, 1840 में महाराज बाला राव की मृत्यु के बाद अंग्रेजों ने ईस्ट इंडिया कंपनी के राज्य में जालौन को मिलने की घोषणा कर दी थी किंतु महारानी ताइबाई और उनकी राज्य की जनता ने इसे को स्वीकार नहीं किया। अंत तक वह इसके लिए लड़ती रही, तात्या टोपे पेशवाई के अधिकार से नाना गोविंद राव की नातिन के 5 वर्षीय पुत्र गोविंद राव को जालौन राज्य का राजा घोषित कर दिया था, ताइबाई को उनका संरक्षण बनाकर शासन चलाने की जिम्मेदारी सौंप गई थी, महारानी ताईबाई ने जालौन में स्वतंत्र क्रांतिकारी सरकार की घोषणा कर दी थी,इसके बाद नाना साहब के भतीजे राव साहब पेशवा को कालपी बुलाकर स्वतंत्र पेशवाई राज की स्थापना कर दी, महारानी ताइवान ने तात्या टोपे को पेशवाई राज का सेनापति बनाया था महारानी ताइबाई ने आर्थिक सैन्य मदद दी और अंग्रेजों खिलाफ बिल्कुल फूंक दिया था, ऐसी महान क्रांतिकारी महारानी ताई बाई को उनके त्याग और बलिदान के लिये जनपद उनको हमेशा याद रखे इसके लिये उन्हे उचित स्थान दिया जाना चाहिये।