जालौन से ब्रजेश उदैनियाँ की रिपोर्ट
जालौन। नगर में सट्टे का अवैध कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है, लेकिन इसे रोकने में पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में नजर आ रही है। शहर के कई इलाकों में सट्टा लिखने और खिलाने का काम बेखौफ तरीके से जारी है, जबकि पुलिस द्वारा कभी-कभार छोटे-मोटे सटोरियों को पकड़कर कार्रवाई की औपचारिकता पूरी कर ली जाती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार मुहल्ला मुरली मनोहर, तकिया, कटरा सहावनाका, तोपखाना, बैठगंज और चिमन दुवे क्षेत्र सट्टा कारोबार के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। यहां दिन ढलते ही सटोरियों की सक्रियता बढ़ जाती है और खुलेआम पर्चियों पर अंक लिखे जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सब लंबे समय से चल रहा है, फिर भी बड़े सट्टा संचालकों तक पुलिस की पहुंच नहीं हो पा रही है।
बताया जा रहा है कि जब भी दबाव बढ़ता है, तब पुलिस कुछ छोटे सटोरियों को पकड़कर चालान कर देती है, लेकिन कुछ ही दिनों में वही गतिविधियां दोबारा शुरू हो जाती हैं। इससे आम जनता में यह चर्चा तेज है कि कार्रवाई दिखावटी है और असली सरगना अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
सट्टा कारोबार के कारण खासकर युवा वर्ग गलत रास्ते पर जा रहा है, जिससे पारिवारिक और सामाजिक माहौल भी प्रभावित हो रहा है। कई परिवार आर्थिक नुकसान और तनाव का सामना कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद इस अवैध धंधे पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है।
नगरवासियों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि सट्टा कारोबार पर सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि ठोस और स्थायी कार्रवाई की जाए तथा बड़े सट्टा संचालकों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि शहर को इस सामाजिक बुराई से निजात मिल सके।