भारतीय मानवधिकार एशोसिएशन जनपद इकाई जालौन के जिला प्रभारी ने अहम भूमिका निभाकर रास्ट्रीय लोक अदालत के अवसर पर दस दंपत्तियों का कराया पुनर्मिलन

उरई (जालौन)। वर्ष 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत के अवसर पर भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन जनपद इकाई जालौन ने सराहनीय पहल करते हुए दस विवादित दंपत्तियों का पुनर्मिलन कराया और उन्हें शुभाशीष देकर नए जीवन की शुरुआत के लिए विदा किया। इस मानवीय पहल से न केवल परिवारों में खुशियाँ लौटीं, बल्कि लंबे समय से न्यायालय के चक्कर काट रहे दंपत्तियों को आपसी समझ और सहमति के साथ साथ रहने का अवसर भी मिला।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय जालौन प्रवीण पाण्डेय ने की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य केवल मुकदमों का निस्तारण करना ही नहीं, बल्कि समाज में आपसी सद्भाव और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत बनाना भी है। उन्होंने पुनर्मिलन करने वाले सभी दंपत्तियों को शुभाशीर्वाद देते हुए उनके सुखद और सफल वैवाहिक जीवन की कामना की।
इस दौरान भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन के जिला प्रभारी एडवोकेट संजीव दीक्षित एवं विधिक सचिव नेहा निरंजन ने विवादित दंपत्तियों की काउंसिलिंग कराई। उनकी सकारात्मक पहल और समझाने से लंबे समय से चल रहे पारिवारिक विवाद समाप्त हुए और सभी दंपत्तियों ने एक साथ मिलकर नया जीवन शुरू करने का निर्णय लिया।
इस अवसर पर जिला महासचिव सलिल तिवारी, डॉ. सविता सिंदूर, विनीता सहित अनेक अधिवक्तागण तथा भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन के पदाधिकारी और सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।