यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन ने कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को मर्ज करने के विरोध में एक ज्ञापन जिलाधिकारी जालौन को देते हुए कहा कि यह आदेश ग्रामीण क्षेत्रों के नौनिहालों के भविष्य के लिए कुठाराघात है। यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन ने कहा है कि अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा उत्तर प्रदेश शासन के द्वारा परिषदीय विद्यालयों में जहां 50 से कम छात्रांकन है ऐसे विद्यालयों को मर्ज किया जाएगा। शासन के इस निर्णय का यूटा विरोध करता है क्योंकि इस आदेश से ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे नौनिहालों के भविष्य के साथ कुठाराघात होगा। यूटा ने अपनी आपत्तियों में बताया कि आरटीई एक्ट में स्पष्ट लिखा है कि एक किलोमीटर अथवा 300 की जनसंख्या में विद्यालय होगा एवं 6 से 14 वर्ष के बच्चों को स्थानीय स्तर पर शिक्षा मिलना अनिवार्य है,इसे किसी शासनादेश से अतिक्रमित नहीं किया जा सकता। परिषदीय विद्यालयों के मर्जर से आरटीई एक्ट की धारा -3 धारा -4 अतिक्रमित हो रही है। ऐसे में सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
ज्ञापन देने वालों में प्रमुख रूप से यूटा प्रदेश प्रवक्ता सुशील राजपूत जिला महामंत्री डॉक्टर शत्रुघन सिंह अखिलेश कुमार श्रीवास गौरव राज जमीरउद्दीन वीरेंद्र कुमार दीक्षा सिंह चौहान आसमा परवीन यश राजपूत सुरेशवर्मा मोहम्मद अख्तर खान उदयवीर सिंह शीशपाल सिंह रंजन शिवेंद्र पटेल हरिमोहन शहर कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। संगठन ने मांग की है कि सरकार इस आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करें और ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को उनके निकटतम स्थान पर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर सुनिश्चित करें।
विद्यालयों को मर्ज किए जाने का शिक्षकों ने जताया विरोधजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा





