कदौरा। कदौरा विकासखंड के 2 दर्जन से अधिक गांवों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। सफाई कर्मचारियों की लापरवाही और अधिकारियों की उदासीनता ने हालात को और बिगाड़ दिया है। गांवों की गलियों में नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है और जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, जिससे दुर्गंध और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। हालात यह हैं कि नियुक्त सफाई कर्मचारी गांवों में कार्य करने की बजाय कार्यालयों में बाबूगिरी कर रहे हैं। अनेक कर्मचारियों को अधिकारियों ने अपने दफ्तरों में अटैच कर लिया है, जहां वे कागजी फाइलों में उलझे रहते हैं। कुछ सफाईकर्मी तो प्रधानों के घरों और स्कूल परिसरों तक ही सीमित रह गए हैं और वहीं सफाई करके लौट जाते हैं। लोदीपुर, जमरेही, जकसिया, बबीना, अभिरवा, पाली और बागी में बदहाल हालात, जमरेही ग्राम पंचायत के लोदीपुर गांव की गलियों में गंदगी बजबजा रही है। सड़कों पर कीचड़ और नालियों का गंदा पानी बह रहा है। ऐसे ही हालात बागी, कानाखेडा, हरचन्द्रपुर, बबीना, कटपुरवा, मवई ब्राह्मण, कुरहना आलमगीर, जकसिया, बरखेड़ा, सुरौला और पाली गांवों में भी देखने को मिल रहे हैं। कई गांवों में सफाईकर्मी महीने भर में सिर्फ 3-4 दिन ही नजर आते हैं, बाकी समय या तो निजी कार्यों में लगे रहते हैं या फिर कार्यालयों में बाबू बनकर बैठे रहते हैं। इन कर्मचारियों को जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का संरक्षण प्राप्त है, जिससे इन पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाती। ग्रामीणों की मानें तो कई बार शिकायतों के बावजूद भी कोई सुनवाई नहीं होती। ये सफाईकर्मी वेतन लेने हर माह प्रधानों के घर हाजिरी लगाने जरूर पहुंच जाते हैं, लेकिन सफाई कार्य में इनकी रुचि नहीं होती। इस गंदगी के चलते गांवों में मच्छर और बीमारियां पनप रही हैं। डेंगू, मलेरिया और त्वचा रोगों का खतरा बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्थिति नहीं सुधारी गई तो महामारी फैल सकती है। बावजूद इसके प्रशासनिक अमला मौन साधे बैठा है। जब इस सम्बंध में जिला पंचायत राज अधिकारी राम अयोध्या प्रसाद ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है जांच कर कार्यवाही की जाएगी।
गांवों में गंदगी का अंबार, सफाईकर्मी कार्यालयों में बाबूगीरी में व्यस्त


