सवाल तो बहुत हैं जिनके जबाब अधिकारियों को देना है 

  • मामला निजी अस्पताल में गलत इलाज के कारण 11 वर्षीय किशोर की हुई मौत का

कोंच। जिस गरीब व्यक्ति का पाला-पोसा 11 साल का बेटा किसी डॉक्टर की लापरवाही से सेंतमेंत में मरा है वह न्याय पाने के लिए अधिकारियों की चौखटों पर मारा-मारा भटक रहा है लेकिन अब तक के प्रशासनिक, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस क्रियाकलापों में उसे फिलहाल उम्मीद की एक छोटी सी किरण भी नहीं दिखाई दे रही है। इस मौत के पीछे सवाल तो तमाम खड़े हैं लेकिन उनके जबाब सिर्फ अधिकारियों के पास हैं। अगर उक्त निजी अस्पताल पर कोई कार्रवाई नहीं होती है तो साफतौर पर माना जाएगा कि न्याय और कानून के शिकंजे सिर्फ गरीबों के लिए हैं, बड़े और रसूखदार लोगों के लिए नहीं। नया पटेल नगर में संचालित वात्सल्य क्लिनिक पर सोमवार की शाम कस्बे के गांधी नगर का रहने वाले रामू प्रजापति अपने 11 साल के बेटे विवेक को इलाज के लिए ले गया था। वहां उसका इलाज किया गया और दवाएं देकर छुट्टी कर दी गई लेकिन रात में विवेक की तबीयत ऐसी बिगड़ी कि उसके नाक-मुंह से झाग निकलने लगा। बेटे की ऐसी हालत देख हड़बड़ाया रामू उसे वात्सल्य क्लिनिक ले गया लेकिन उसके मरणासन्न बेटे को देखने के लिए अस्पताल ने लाल झंडी दिखा दी। रामू का आरोप है कि डॉक्टर ने विवेक को देखने से मना कर दिया और जब वह उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गया तो डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। यहां सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि मृतक के परिजनों के आरोपों पर प्रशासन ने अब तक गंभीरता से संज्ञान क्यों नहीं लिया जबकि घटना को आज चौथा दिन है। इन स्थितियों में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अस्पताल के खिलाफ कोई कार्रवाई की भी जाएगी या नहीं। यहां कुछ और भी अनुत्तरित प्रश्न हैं जिनके जबाब मिलने ही चाहिए। मसलन, क्या रात में तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल लाए गए बच्चे को वात्सल्य के डॉक्टर को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए था। पेट दर्द और मुंह में छालों की आखिर ऐसी कौन सी दवा दी गई जिसने बच्चे की जान ले ली। क्या इसकी जांच नहीं होनी चाहिए कि क्लिनिक के मेडिकल स्टोर में वो कौन सी दवा थी जो जानलेवा साबित हुई। ऐसे तमाम अनुत्तरित प्रश्न लोगों के जेहन में गूंज रहे हैं जिनके जबाब अधिकारियों के पास हैं। अब देखने वाली बात यह है कि अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम को कितनी गंभीरता से लेते हैं और अस्पताल के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।

इंसेट में-

अब तक क्यों नहीं पहुंचे प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस विभाग 
कोंच। 11 साल के किशोर की मौत मामले में हैरान करने वाली बात यह है कि घटना को आज चौथा दिन है लेकिन न तो प्रशासन में बैठे अधिकारी और न ही स्वास्थ्य और पुलिस विभाग के अधिकारियों ने मौके पर जाकर पड़ताल करने की जेहमत उठाई है। मृतक किशोर का पिता घटना वाले दिन ही एसडीएम के यहां शिकायत कर चुका था लेकिन एसडीएम ने जांच के लिए सीएमओ को चिट्ठी लिख कर अपनी तरफ से पल्ला झाड़ लिया, जबकि एक पूर्व के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए खुद खड़े होकर अस्पताल सील करा दिया था। बहरहाल, अब अधिकारियों की सोच और रवैये पर ज्यादा कुछ कहना ठीक नहीं होगा क्योंकि उनके ऊपर भी सत्ता का दबाव तो रहता ही है।

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